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मैं श्रीश बेंजवाल शर्मा, चिट्ठाजगत में ई-पण्डित के नाम से जाना जाता हूँ। अधिकतर तकनीकी विषयों विशेषकर हिन्दी/इण्डिक कम्प्यूटिंग पर लिखता हूँ। यह चिट्ठा व्यक्तिगत बकबक के उद्देश्य से बनाया गया है।

मुझे हिन्दी में लिखना पसन्द है एवं चिट्ठाकारी तथा विकिपीडिया पर काम करना मेरा मनपसन्द टाइमपास है। हिन्दी को इण्टरनेट पर अन्य वैश्विक भाषाओं के समान स्थान मिले, यह इच्छा एवं उद्देश्य है। कम्प्यूटर में रुचि स्नातकी के दौरान उत्पन्न हुयी, उसके बाद कम्प्यूटर मेरा बैस्ट फ्रैण्ड बन गया। हर समय कम्पूयटर पर लगे रहने के कारण घरवाले गरियाते रहते हैं। भानजे-भानजियों से कंपूटर वाले मामा का खिताब मिला हुआ है। हिन्दी चिट्ठाकारी में आने के बाद हिन्दी कम्प्यूटिंग में रुचि जागृत हुयी। हिन्दी चिट्ठाजगत के मित्रों ने अनेक निकनाम/उपाधियाँ दीं जिनमें मास्साब, पण्डित जी, टैक-गुरु, मास्टर जी आदि शामिल हैं।

चिट्ठाकारी की कहानी कुछ इस तरह है कि बहुत समय पहले इच्छा हुयी कि अपने (अ)ज्ञान को बाँटा जाय तो उचित माध्यम की खोज शुरु हुयी, बहुत सोच-विचार के बाद ब्लॉग को उपयुक्त पाया। अपना पहला ब्लॉग ब्लॉगर पर बनाया। उस समय ऍचटीऍमऍल का ज्ञान न होने से उसे संजाने-संवारने में दिक्कत आयी तो वर्डप्रैस.कॉम की खूबसूरत थीम्स ने आकर्षित किया एवं वह पहला ब्लॉग वर्डप्रैस.कॉम पर शिफ्ट किया

हिन्दी चिट्ठाकारी में आने की कहानी कुछ यूँ है कि एक बार हिन्दीराइटर नामक आइऍमई हाथ लगा, उससे गूगल पर कुछ हिन्दी शब्द खोज कर देखे तो हिन्दी चिट्ठों की दुनिया में पहुँच गया, उस मायावी दुनिया ने इतना आकर्षित किया कि अंग्रेजी चिट्ठे भूलकर उसी में रम गया। कुछ समय पश्चात अपना चिट्ठा ई-पण्डित वर्डप्रैस.कॉम पर आरम्भ किया। पाठकों का अच्छा साथ मिला एवं चिट्ठा प्रसिद्ध होने लगा। कुछ समय पश्चात वर्डप्रैस.कॉम की कमियों को देखते हुये ब्लॉगर पर शिफ्ट हुआ। इस दौरान तकनीक, हिन्दी टाइपिंग, हिन्दी/इण्डिक कम्प्यूटिंग सम्बंधी अनेक लेख लिखे एवं ई-पण्डित शीर्ष हिन्दी चिट्ठों में जाना जाने लगा। अक्टूबर २००७ में निजी जीवन की व्यस्तताओं एवं कैरियर के संघर्ष के चलते चिट्ठाकारी एवं इण्टरनेट से अस्थायी संन्यास ले लिया जिसे दोस्तों ने अज्ञातवास का नाम दिया।

सन २००९ में सरकारी सेवा में आने के बाद जब कैरियर के संघर्ष से मुक्ति मिली तो वापसी की योजना बनी एवं लगभग दो वर्ष के अज्ञातवास के बाद फरवरी २०१० में ई-पण्डित की अपने डोमेन पर वापसी हुयी।

व्यक्तिगत जानकारी:

  • नाम : श्रीश बेंजवाल शर्मा
  • काम : मास्टरगिरी
  • उम्र : थो़ड़ी ही है
  • जन्मदिन : ४ सितंबर १९८२ (तोहफे स्वीकार करता हूँ)
  • जन्मस्थान : रुद्रप्रयाग (उतराञ्चल)
  • पसंदीदा काम : मैं और मेरा कंप्यूटर अक्सर बातें करते हैं अकेले में।
  • ईश्वर में विश्वास रखता हूँ, शराब-सिगरेट आदि नशों से परहेज है।
  • हिन्दी, हरियाणवी (Simplified), गढ़वाली तथा कुछ हद तक ठेठ हरियाणवी (Traditional) भी बोल लेता हूँ। पंजाबी सिर्फ समझ सकता हूँ।
  • IAD (Internet Addiction Disorder) से पीड़ित, अलग-अलग समय पर सनक चढ़ती रहती है, ताजा संक्रमण : हिन्दी चिट्ठाकारी

इण्टरनेट पर मेरे ठिकाने:

मेरे चिट्ठे:

  • ई-पण्डित: लेखक का मुख्य चिट्ठा जो कि हिन्दी के पथप्रदर्शक तकनीकी ब्लॉग के रुप में प्रसिद्ध है। इस पर तकनीक, सॉफ्टवेयर, इण्टरनेट, हिन्दी टाइपिंग, ब्लॉगिंग तथा कम्प्यूटिंग सम्बंधी विविध लेख हैं। हिन्दी के सर्वाधिक लोकप्रिय एवं श्रेष्ठ चिट्ठों में से एक।
  • श्रीश पण्डित: लेखक का व्यक्तिगत चिट्ठा। मेरी आँखों से दुनिया पर एक नजर, कुछ खट्टे, कुछ मीठे अनुभव।
  • श्रीश@ट्विटर: ट्विटर पर खाता बनाया २००६ में पर सक्रिय रुप से ट्विटियाना शुरु किया २००९ में। इसका प्रयोग माइक्रो-ब्लॉगिंग एवं मोबाइल ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म के रुप में करता हूँ।
  • हरियाणवी चौपाल: हरियाणवी का पहला चिट्ठा, हरियाणा से जुड़े विभिन्न विषयों पर।
  • हमारा बेंजी: ग्राम बेंजी, रुद्रप्रयाग (उत्तराञ्चल) का सामुदायिक सामूहिक चिट्ठा।
  • चिट्ठा चर्चा: हिन्दी चिट्ठाजगत से चिट्ठों की चर्चा हेतु एक सामूहिक चर्चा ब्लॉग।
  • विकि विश्व: विभिन्न हिन्दी विकिपरियोजनाओं (हिन्दी विकिपीडिया, सर्वज्ञ आदि) का अनाधिकारिक ब्लॉग।

ई-मेल सम्पर्क पता: me @ shrish . in सम्पर्क के लिए अधिक जानकारी यहाँ देखें।